खेत बचाओ अभियान से मजबूत होगी टिकाऊ खेती की नींव,किसानों को मिल रही वैज्ञानिक जानकारी
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गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। खेतों की मिट्टी की सेहत बचाने,खेती की लागत घटाने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से जनपद पौड़ी गढ़वाल में खेत बचाओ अभियान रबी 2026 संचालित किया जा रहा है। 30 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग,प्राकृतिक एवं जैविक खेती,हरी खाद और मृदा संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल फसल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं,बल्कि भूमि की उर्वरता बनाए रखते हुए कृषि संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को भी प्रोत्साहित करना है। मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल ने बताया कि अभियान के तहत सप्ताह में पांच दिन गांवों एवं निर्धारित कार्यक्रम स्थलों पर किसानों से संवाद किया जा रहा है। कृषि विभाग,कृषि विज्ञान केंद्र भरसार,आईसीएआर,सीएसआईआर तथा उद्यान,पशुपालन,मत्स्य,रेशम,जड़ी-बूटी,भेषज,सहकारिता,सगंध पौध केंद्र और इफको के समन्वय से किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीकों और विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों के शोध एवं अनुभवों को किसानों तक पहुंचाने के साथ उनकी समस्याओं और सुझावों को भी महत्व दिया जा रहा है। मुख्य कृषि अधिकारी ने बताया कि मिट्टी की जरूरत के अनुरूप उर्वरकों का प्रयोग सुनिश्चित करने के लिए मृदा नमूना संग्रहण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को संतुलित पोषण,जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों और कृषि संसाधनों के उचित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ अनावश्यक लागत को कम करने की भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही भूमि में मौजूद लाभदायक मित्र कीटों का संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि,फसल बीमा,मृदा परीक्षण,एग्रोफॉरेस्ट्री,एग्रोस्टैक तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की अन्य योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। किसानों को बीज,उर्वरक,कृषि रसायन और कृषि यंत्रों की उपलब्धता से अवगत कराने के लिए विभागीय स्टॉल लगाए जा रहे हैं। साथ ही आत्मनिर्भर दलहन एवं तिलहन मिनीकिट वितरण के साथ स्वयं सहायता समूहों,कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ),इनपुट डीलरों और किसान क्रेडिट कार्ड लाभार्थियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है। अभियान में सफल कृषि प्रयोगों और बेहतर कार्य करने वाले किसानों एवं कृषक समूहों के अनुभवों को साझा करने किया जा रहा है,ताकि अन्य किसान भी उपयोगी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें। कार्यक्रम हेतु कंट्रोल रूम की भी स्थापना की गयी है।
