समृद्ध बनेगा नृसिंहाचल पर्वत
सबसे तेज प्रधान टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के छात्र इन दिनों विशेष शिविर के तहत परिसर को संवार रहे हैं। यह शिविर पर्यावरण केंद्रित होने के कारण छात्र पौधरोपण कर रहे हैं,साथ ही परिसर को आग की घटनाओं से बचाने के लिए अगल-बगल वाली झाड़ियों को भी काट रहे हैं। श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर जिस पहाड़ी की तलहटी पर बसा है,उसका नाम नृसिंहाचल है। इसलिए इस शिविर की थीम ’नृसिंहाचल बनेगा सुगंधाचल और समृद्धांचल’ रखी गयी है। श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में इन दिनों सात दिवसीय एनएसएस शिविर चल रहा है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा अतिरिक्त कार्य के 6 क्रेडिट अर्जित करने होते हैं। इनमें एक क्रेडिट इस शिविर का मिलेगा। 25 मार्च को आरंभ हुए शिविर के अंतर्गत बच्चों ने खेल मैदान में मिट्टी भरान और उसके समतलीकरण का कार्य किया। फूल और लताएं उगाने के लिए परिसर के कोनों पर खाली पड़ी जमीन को खोदा और संवारा गया है। इस जमीन पर नीम के 10 पौधे लगाये गये हैं। परिसर की दीवारों पर बने छिद्रों पर रह रही गौरेया पक्षियों के लिए पानी और दाने के पात्रों की व्यवस्था भी बच्चों ने की। इस आवासीय शिविर में 50 बच्चे भाग ले रहे हैं। ये बच्चे प्राक्शास्त्री से आचार्य तक के हैं। उन्हें एक घंटा सुबह और दो घंटे शाम को कार्य करना होता है। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ.सुरेश शर्मा की देखरेख में आयोजित इस शिविर में विमलेश उनियाल,पवन कुकरेती,योगेश सेमवाल,लकी कैरवान,अक्षत डंगवाल,शिवानी ठाकुर,कीर्ति,मीनाक्षी,प्रियांशी खंखरियाल,मिथलेश नौटियाल,हिमांशु सती,अजय भट्ट,साहिल शर्मा,सागर आदि भाग ले रहे हैं। डॉ.सुरेश शर्मा ने बताया कि परिसर में ही आयोजित इस शिविर का लाभ यह है कि बच्चों के समय का सदुपयोग हो रहा है। उनकी कक्षाएं बाधित नहीं हो रही हैं। उन्हें पर्यावरण संरक्षण और वन्य जंतुओं से प्रेम की प्रेरणा भी दी जा रही है। शिविर के बाद बच्चों को प्रमाणपत्र दिये जाएंगे। परिसर निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि नृसिंहाचल पर्वत पर पर्यावरणीय दृष्टि से बहुत कार्य किया जाना है। हम पहले ही इस पहाड़ी को पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध करने की प्रतिबद्धता प्रकट कर चुके हैं। परिसर में 500 से अधिक पौधे लगाये जा चुके हैं। इसके बाद परिसर के ऊपर की ओर पौधरोपण किया जाना है। आग की दृष्टि से यह टापू संवेदनशील है। गत वर्ष आग की घटनाओं से परिसर प्रशासन ने सबक लिया है। इस बार आग सीजन से पहले ही आवासीय क्षेत्र के अगल-बगल की झाड़ियों को काटा जा रहा है। परिसर के वातावरण को जीव-जंतुओं के अनुकूल बनाया जा रहा है। परिसर में हरियाली और गौरेया के आवासों के निकट दाना-पानी की व्यवस्था इसीके तहत की जा रही है। शिविर के बाद स्वयंसेवियों को कार्य के प्रमाण-पत्र के साथ ही एक क्रेडिट का प्रमाण-पत्र भी दिया जाएगा।